जादुई मटका || jadui mataka

जादुई मटका || moral short story in hindi

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एक बार की बात है एक गांव में चंदू नाम का एक लड़का रहता था। चंदू बहुत ही नेक दिल इंसान था उसकी एक छोटी सी किराने की दुकान थी गांव में जिससे उसका गुजर बसर चलता था। और जिस गांव में चंदू रहता था वहा पानी की बहुत कमी थी। वहा वर्ष में सिर्फ एक बार ही बारीस होती थी। जिससे गांव के लोगो को पानी लेने के लिए बहुत दूर जाना पड़ता था।

एक चंदू अपनी दुकान में बैठा था उसका गर्मी से बुरा हाल था। तभी उसके दुकान के सामने एक बूढ़ा आदमी आकर बैठ जाता है। कुछ देर बैठने के बाद वह बुढा आदमी पानी मांगने लगता है। चंदू सोचता है कि वैसे की गाव में पानी की कमी बड़ी मुश्किल से पानी का बंदोबस्त हो पाया है। अगर मैं इस आदमी को पानी देता हूं तो पानी कम हो जाएगा।

लेकिन पानी नही देना भी बहुत गलत होगा। चंदू सोचने के बाद पास में रखे घड़े से पानी लाता हैं और उस बूढ़े आदमी को दे देता है। एक गिलास पानी पीने के बाद बूढ़े आदमी की प्यास नही बुझती हैं और वो और पानी मांगता है। इससे पहले चंदू पानी देता की वह बुढा आदमी खुद उठ कर घड़े का पूरा पानी पी जाता है।

चंदू उदास होकर उस आदमी का मुह देखता रह जाता है। और बुढा आदमी पानी पी कर तृप्त हो जाता है। और खुशी खुशी चंदू से कहता हैं तुम बहुत दयालु हो तुमने इतनी गर्मी में मुझ जैसे प्यासे को पानी पिला कर बहुत नेक काम किया है। तुम ऐसे ही सबकी मदद करते रहना ऐसा कह कर वह बुढा आदमी वह से चल जाता है।

कुछ देर बाद चंदू को भी प्यास लगती है वह मटके की ओर जाता है फिर उसको याद आता है कि मटके का तो पानी खत्म हो गया है। वह मटके को मुह तक लाता है उसमें से थोड़ा पानी निकलता है जिससे उसकी प्यास बुझ जाती है। और वो खुश हो जाता है फिर सोचता है कि इस मटके में तो पानी बिल्कुल भी था फिर ये पानी आया कहा से ये सब सोच ही रहा था।

तभी उसके दुकान पे एक आदमी आता है और चन्फ का हाल पूछता है कहता ये पर्चा लो सारा सामान दे दो चंदू ने जवाब देते हुए बोला मैं तो ठीक हु तुम कैसे हो और तम्हारा पैर कैसा है और उस आदमी ने जवाब दीया ठीक हु अब पैर तो इतनी जल्दी ठीक तो होने वाला है नही और चंदू पर्चा देख सामान देने लगता है। और उस आदमी ने चंदू से बोला बहुत गर्मी है थोड़ा पानी मिलेगा।

चंदू ने बोला थोड़ा पानी था मैंने पी लिया अब नही हैं पानी उस आदमी ने बोला उस घड़े में देखो पानी तो भरा है। चंदू तो भरा मटका देख चौक जाता है। और उस मटके से थोड़ा पानी दे देता है वो आदमी पानी पी कर सामान ले कर चला जाता है। उस आदमी के जाने के बाद चंदू सोचता है मटका तो पूरा खाली था पानी कहा से आया।

कुछ देर बाद जो आदमी सामान लेने आया था वो अपनी बहन को ले कर आता है। और कहता है चंदू मेरी बहन को बहुत तेज बुखार है चंदू बोलता है डॉक्टर के पास ले जाओ मेरे पास क्यो आये हो वो आदमी बोलता है जो तुमने पानी दिया था उस पानी की पी कर मेरा पैर थीक हो गया। वह पानी मेरी बहन को भी पिला दो जिससे इसका बुखार ठीक हो जाएगा।

चंदू पानी पिलाता है और उसकी बहन बिल्कुल ठीक हो जाती है। धीरे धीरे मटके वाली बात पूरे गांव में फैल जाती है। फिर सब लोग चंदू के पास अपनी बीमारी का इलाज कराने आने लगे। चंदू सबकी मदद कर बहुत खुश होता है। वह पानी पिलाने के किसी से कुछ नही लेता था। लेकिन लोग अपनी खुशी से कुछ न कुछ दे रहे थे।

अब चंदू के दुकान के सामने रोज लोग आने लगे चंदू सोचने लगा यदि एक अमीर आदमी रोज आये तो एक ही दिन में कितने पैसे बन जाएंगे। एक दिन एक बुढा आदमी आता है उससे पानी मांगता है अभी सिपाही आ जाते है और उसको अपने साथ चलने को बोलते हैं। महारानी को चोट लगी है उन्हें यह पानी पिला कर ठीक करो चंदू बोला रुको पहले इस बुढे आदमी को पानी पिलाने दो सिपाही बोले नही।

पहले तुम महारानी का इलाज करोगे जिसके बदले में तुमको बहुत सारा धन और इनाम मिलेंगे सिपाही की बात सुन कर चंदू के मन मे लालच आ जाता है वे तुरंत मटका उठाकर सिपाहियों के साथ महल चला जाता है महल पहुच कर जैसे ही वे मटके से पानी निकालता है तो वह देखता है कि मटका खाली है। चंदू हैरान रह जाता है महराज चंदू से कहते है क्या हुआ चंदू इतना समय क्यो लग रहा है।

जल्दी करो चंदू बोलता है ऐसा कैसे हो सकता है अभी तो माटका भर हुआ था। यह खाली कैसे हो गया महराज बॉलर यह खाली था तो तुम यह आये ही क्यो चंदू को बाहर निकाल दिए। चंदू निरास होकर अपना मटका लिए वापस आ जाता है। आपस आ कर देखता है वह बुढा आदमी भी नही है जिसे वह पानी बिना पिलाये चल गया था।

फिर चंदू को खुद पर अफसोस होता हैं कि उसने लालच में आकर बहुत बड़ी गलती कर बैठा है। वह सोचता है कि अब मैं लोगो की मदद कैसे करूँगा। चंदू अपनी भूल का पश्चाताप करने के लिए उसको जितने भी इलाज करने के दौरान लोगो ने पैसे दिए थे उस पैसे से गांव मे एक डॉक्टर का प्रबंध किया जिससे लोगो का इलाज हो सके जिससे लोगो को जादू पर निर्भर ना रहना पड़े।

चंदू अपने गांव में बैद्य का प्रबंध कर देता है और अपनी गलती का पश्चाताप करता है।

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जादुई मटका || jadui mataka जादुई मटका || jadui mataka Reviewed by Motivational stories in hindi on जनवरी 07, 2019 Rating: 5

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