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सफलता कैसे मिलती है

जब तुम अपने किसी भी काम को अपनी शाशो की तरह अपनी जरूरत बना लोगे तो उस काम मे जरूर सफल हो जाओगे। इसके अलावा सफलता का कोई और रहस्य नही है।

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Success

दोस्तो बहुत पहले एक गांव में एक युवक रहा करता था। वो  युवक बहुत ही मेहनती था और वो अपने जीवन मे बहुत ही सफल व्यक्ति बनना चाहता था। परन्तु जब भी वो युवक किसी कार्य को करना सुरु करता था। तो वह कार्य थोड़ा बहुत आगे बढ़ने के बाद बन्द हो जाया करता था। इस तरह वह अपने कई कार्यो में असफल होने के कारन वह युवक परेशान रहने लगा था।

और वो उस रहश्य का पता लगाने लगा था जिससे लोगो को सफलता मील जाती हो। काफी समय तक सफलता पाने का रहस्य नही मिल पाया तो वह बड़े ही अत्यधिमक गुरु सुकरात के सरण में चला गया। गुरु सुकरात ने पूछा की ओ उनके पास किस लिए आया है। तो उस युवक ने कहा कि मैं अपने जीवन के कई कार्यो में असफल रहा हु। तो इस लिए आपके पास अपने जीवन मे सफलता का रहश्य जानने के लिए आया हु।

तो गुरु सुकरात ने अपने सामने बैठे हुये के भक्तों को देखते हुये। तो उस युवक से कहा की मैं सफलता पाने का रहस्य इन सभी के सामने नही बता सकता। मैं साम को टहलने के लिये नदी के किनारे अकेले जाता हूं। तुम मुझे वहा आकर मिलो तब मैं तम्हे सफलता पाने का रहस्य अवस्य बतलाऊंगा। सुकरात की ये बात सुनकर वह युवक खुश हो गया था और सफलता का रहस्य पाने के लिये वह युवक नदी किनारे पहुच गया।

जैसे ही गुरु सुकरात नदी किनारे आये वह युवक तेजी से भागकर उनके पास पहुच गया। और बोला गुरुदेव यहां कोई और आ जाये उससे पहले ही मुझे सफलता का वह रहस्य बता दीजिये। यह बात सुनकर सुकरात ने उस युवक के कंधे  पर हाथ रखा और कहा चुप चाप मेरे साथ चलते रहो। वह युवक चुप चाप सुकरात जी के साथ चल दिया। आगे नदी आने पर सुकरात जी नदी में चलने लगे वह युवक भी नदी में साथ आगे बढ़ने लगा।

नदी में वहां जा के रुके जहा गले तक पानी था। वह युवक जब तक कुछ समझ पाता सुकरात जी ने उस युवक का सर पकड़ कर उसको पानी मे डुबो दिया। तो वह युवक पानी से बाहर निकलने के लिए छटपटाने लगा। थोड़ी देर बाद सुकरात जी ने उस युवक को पानी से बाहर निकाला। तो वह युवक हांफता हुआ तेज तेज शास लेने लगा। युवक के सांत होने के बाद सुकरात जी ने उस युवक से पूछा 

जब मैं यानी तुम्हारे गुरु जी ने तम्हारा सर पानी डुबोया था तो तुम बाहर निकलने के लिये जोर क्यो लगा रहे थे। तो युवक ने जवाब दिया कि मैं शास लेना चाहता था इस लिये सर बाहर निकलने के लिये जोर लगा रहा था। तब सुकरात जी ने उस युवक से कहा यही सफलता का रहस्य है। 

क्योकि जब तुम अपने किसी भी काम को अपनी शाशो की तरह अपनी जरूरत बना लोगे तो उस काम मे जरूर सफल हो जाओगे। इसके अलावा सफलता का कोई और रहस्य नही है।


|| inspirational || सफलता कैसे मिलती हैं || || inspirational || सफलता कैसे मिलती हैं || Reviewed by Brijesh kumar on दिसंबर 01, 2018 Rating: 5
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